धनतेरस की पूजा किस दिन और कितने बजे करनी चाहिए?
हिंदू चंद्र-सौर कैलेंडर के अनुसार, धनतेरस 2026 में शुक्रवार, 6 नवंबर को है। यह पर्व कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर मनाया जाता है। पूजा का शुभ मुहूर्त शहर के अनुसार बदलता है, इसलिए तैयारी से पहले अपने शहर का समय देख लें।
यहाँ आपको 15 शहरों के पूजा मुहूर्त, त्रयोदशी तिथि, पूजा सामग्री, घर पर पूजा करने की आसान विधि और यम दीपदान की जानकारी मिलेगी।
धनतेरस 2026 कब है? तारीख और त्रयोदशी तिथि
| विवरण | तारीख | समय |
|---|---|---|
| धनतेरस 2026 | शुक्रवार, 6 नवंबर | शाम को पूजा |
| त्रयोदशी तिथि शुरू | 6 नवंबर 2026 | सुबह 10:30 बजे |
| त्रयोदशी तिथि समाप्त | 7 नवंबर 2026 | सुबह 10:47 बजे |
इस लेख में दिए गए सभी समय भारतीय मानक समय (IST) के अनुसार हैं।
धनतेरस 6 नवंबर को है या 7 नवंबर को?
धनतेरस की पूजा 6 नवंबर 2026 को होगी। त्रयोदशी तिथि अगले दिन तक रहने के कारण तारीख को लेकर भ्रम हो सकता है।
धनतेरस की शाम की पूजा के लिए त्रयोदशी का प्रदोष काल, यानी सूर्यास्त के बाद के समय में होना देखा जाता है। इस साल 6 नवंबर की शाम को त्रयोदशी रहेगी, जबकि 7 नवंबर को यह सुबह ही समाप्त हो जाएगी।
धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त 2026: 15 शहरों का समय
| शहर | पूजा का मुहूर्त शुरू | पूजा का मुहूर्त समाप्त |
|---|---|---|
| नई दिल्ली | शाम 6:02 बजे | शाम 7:57 बजे |
| मुंबई | शाम 6:35 बजे | रात 8:35 बजे |
| बेंगलुरु | शाम 6:25 बजे | रात 8:20 बजे |
| हैदराबाद | शाम 6:15 बजे | रात 8:13 बजे |
| चेन्नई | शाम 6:14 बजे | रात 8:10 बजे |
| कोलकाता | शाम 5:28 बजे | शाम 7:26 बजे |
| अहमदाबाद | शाम 6:30 बजे | रात 8:28 बजे |
| पुणे | शाम 6:32 बजे | रात 8:31 बजे |
| जयपुर | शाम 6:11 बजे | रात 8:07 बजे |
| लखनऊ | शाम 5:50 बजे | शाम 7:47 बजे |
| वाराणसी | शाम 5:44 बजे | शाम 7:42 बजे |
| पटना | शाम 5:36 बजे | शाम 7:33 बजे |
| चंडीगढ़ | शाम 6:00 बजे | शाम 7:54 बजे |
| गुरुग्राम | शाम 6:03 बजे | शाम 7:59 बजे |
| नोएडा | शाम 6:01 बजे | शाम 7:57 बजे |
ये सभी पूजा मुहूर्त 6 नवंबर 2026 के लिए हैं।
हर शहर में धनतेरस पूजा का समय अलग क्यों है?
पूजा का मुहूर्त तय करते समय त्रयोदशी तिथि, प्रदोष काल और वृषभ लग्न का एक साथ होना देखा जाता है। सूर्यास्त और लग्न का समय स्थान के अनुसार बदलता है।
वृषभ एक स्थिर लग्न है, जिसे इस पूजा के लिए शुभ माना जाता है। इस समय पूजा करने के लिए आपकी राशि वृषभ होना जरूरी नहीं है।
धनतेरस पूजा सामग्री की सूची
पूजा के दिन छोटी-छोटी चीजें ढूँढने से बचने के लिए सामग्री पहले ही एक जगह रख लें।
अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार यह सामान तैयार करें:
- पूजा में उपयोग होने वाली मूर्तियाँ या तस्वीरें
- साफ कपड़ा, चौकी और पूजा की थाली
- मिट्टी के दीपक, रूई की बत्ती, तेल या घी
- छोटे पात्र में साफ जल
- ताजे फूल
- चंदन, रोली और अक्षत, जहाँ इनका उपयोग होता हो
- धूप या अगरबत्ती
- भोग के लिए फल या उपयुक्त मिठाई
- आरती का सामान
यदि आप यम दीपदान करते हैं, तो उसके लिए दीपक अलग से तैयार रखें।
घर पर धनतेरस की पूजा कैसे करें?
नीचे घर पर पूजा करने का एक सरल क्रम दिया गया है। विस्तृत पूजा, विशेष मंत्र और अन्य नियमों के लिए अपनी पारिवारिक या मंदिर की परंपरा अपनाएँ।
- 01
पूजा की जगह साफ करें
पूजा स्थल की सफाई करके सभी सामग्री व्यवस्थित रखें। स्नान के बाद साफ कपड़े पहनकर पूजा के लिए बैठें।
सजावट और खरीदारी का काम पहले पूरा कर लें, ताकि पूजा के समय आपका ध्यान बार-बार दूसरे कामों में न जाए।
- 02
मूर्तियाँ या तस्वीरें रखें
चौकी पर साफ कपड़ा बिछाएँ और अपने घर की परंपरा के अनुसार मूर्तियाँ या तस्वीरें रखें।
धनतेरस पर माता लक्ष्मी और कुबेर जी की पूजा की परंपरा है। यदि आप वैष्णव परंपरा का पालन करते हैं, तो अपने नियमित पूजा स्थल और मंदिर के मार्गदर्शन के अनुसार पूजा करें।
- 03
स्मरण और प्रार्थना से शुरुआत करें
कुछ समय शांत बैठकर भगवान का स्मरण करें। अपने घर में प्रचलित प्रार्थना या मंगलाचरण से पूजा शुरू करें।
पहले से तय क्रम होने पर आप बिना जल्दबाजी के पूजा कर सकेंगे।
- 04
फूल, धूप और दीप अर्पित करें
अपनी परंपरा के अनुसार फूल, धूप और जलता हुआ दीपक अर्पित करें। जहाँ प्रचलन हो, वहाँ चंदन, रोली और अक्षत चढ़ाएँ।
यदि आपने पूजा के लिए सिक्का या बर्तन खरीदा है, तो पारिवारिक रीति के अनुसार उसे पूजा स्थल के पास रख सकते हैं।
- 05
भोग लगाएँ और प्रार्थना करें
तैयार किए गए फल या मिठाई का भोग लगाएँ। अपने परिवार में सिखाए गए मंत्रों और प्रार्थनाओं का पाठ करें।
आप सरल शब्दों में भी अच्छे स्वास्थ्य, सद्बुद्धि और ईमानदारी से अपने कर्तव्य निभाने की शक्ति के लिए प्रार्थना कर सकते हैं।
- 06
आरती करके प्रसाद बाँटें
अपनी परंपरा के अनुसार आरती या समापन प्रार्थना करें। इसके बाद अर्पित भोजन को प्रसाद के रूप में बाँटें।
सामग्री पहले तैयार होगी, तो पूजा के समय आप अधिक सहज रहेंगे।
धनतेरस पर यम दीपदान कब और कैसे करें?
यम दीपदान, जिसे यम दीपम भी कहा जाता है, यमराज से जुड़ी शाम की दीपदान परंपरा है। वर्ष 2026 में यह 6 नवंबर को किया जाएगा।
इस परंपरा में घर के बाहर दीपक रखकर अकाल मृत्यु से रक्षा की प्रार्थना की जाती है। यह धार्मिक मान्यता से जुड़ा आचरण है।
यम दीपदान की तैयारी कैसे करें?
- मिट्टी का दीपक, तेल और रूई की बत्ती तैयार रखें।
- अपने स्थान और परंपरा के अनुसार शाम के समय दीपक जलाएँ।
- घर के बाहर निर्धारित स्थान पर दीपक रखें।
- परिवार में प्रचलित प्रार्थना करें।
दीपक का आकार, बत्तियों की संख्या और रखने की दिशा परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है। यम दीपदान का समय लक्ष्मी-कुबेर पूजा के मुहूर्त से अलग जाँचें।
धनतेरस पर क्या खरीदना चाहिए?
धनतेरस पर नई वस्तु खरीदने की परंपरा है। आप अपनी जरूरत और बजट के अनुसार इनमें से कोई वस्तु चुन सकते हैं:
- सोने या चाँदी का सिक्का
- आभूषण
- पीतल, ताँबे या अन्य धातु के बर्तन
- घर के उपयोग की जरूरी चीजें
- दीपक और पूजा सामग्री
ऐसी चीज चुनें जिसका आप उपयोग करेंगे। उदाहरण के लिए, रसोई में जरूरत का एक बर्तन केवल दिखावे के लिए खरीदी गई महँगी वस्तु से अधिक उपयोगी हो सकता है।
क्या धनतेरस पर सोना खरीदना जरूरी है?
सोना खरीदना एक परंपरा है; घर पर पूजा करने के लिए यह जरूरी शर्त नहीं है। महँगी खरीदारी किए बिना भी आप पूजा की तैयारी कर सकते हैं और अपने घर की रीति निभा सकते हैं।
कुछ खरीदना चाहें, तो पहले अपना बजट तय कर लें।
क्या पूजा और खरीदारी का मुहूर्त एक ही होता है?
ऊपर दी गई सूची में धनतेरस पूजा के मुहूर्त हैं। इन्हें सोना, चाँदी या दूसरी वस्तुएँ खरीदने का अलग मुहूर्त न समझें।
यदि आपके परिवार में खरीदारी का शुभ समय देखने की परंपरा है, तो अपने शहर के लिए वह समय अलग से देखें।
धनतेरस पर क्या नहीं खरीदना चाहिए?
कुछ धातुओं, रंगों या वस्तुओं को न खरीदने की सलाह अलग-अलग क्षेत्रों में दी जाती है। हर ऑनलाइन सूची को अपने घर पर लागू होने वाला नियम न मानें।
अपनी स्थापित परंपरा का पालन करें। किसी रोक का कारण स्पष्ट न हो, तो परिवार के पुरोहित से उसका आधार समझें।
धनतेरस क्यों मनाया जाता है?
धनतेरस से दिवाली के पारंपरिक उत्सव की शुरुआत होती है। इस दिन की परंपराएँ समृद्धि, स्वास्थ्य और पूजा से जुड़ी हैं।
माता लक्ष्मी की पूजा धन और सौभाग्य की देवी के रूप में होती है। कुबेर जी को धन का रक्षक माना जाता है। इस अवसर का संबंध भगवान धन्वंतरि और आयुर्वेद की परंपरा से भी है।
इन संबंधों को जानने से आप धनतेरस की पूजा का महत्व खरीदारी से आगे भी समझ सकते हैं।
धनतेरस को भक्ति के साथ कैसे मनाएँ?
घर की पूजा के साथ अपनी नियमित साधना जारी रख सकते हैं। इसमें नाम जप, शास्त्र सुनना और भगवान को भोजन अर्पित करना शामिल हो सकता है।
यदि आप वैष्णव परंपरा का पालन करते हैं, तो उसी के अनुसार अपना उत्सव मनाएँ। अपनी क्षमता के अनुसार सेवा का कोई छोटा कार्य भी चुन सकते हैं।
धनतेरस से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
धनतेरस 2026 की तैयारी पहले कर लें
अपने शहर का पूजा मुहूर्त देखें, सामग्री पहले से रखें और घर की परंपरा के अनुसार पूजा करें। खरीदारी के लिए उतना ही बजट रखें जितना आपके लिए सहज हो।
6 नवंबर से पहले पूजा सामग्री की सूची बना लें और अपने शहर का समय सेव कर लें, ताकि धनतेरस की शाम आप शांति से पूजा कर सकें।















