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अमावस्या 2026 कब है: अमावस की तारीखें, तिथि और समय — सम्पूर्ण कैलेंडर

2026 की सभी अमावस्या तिथियों का संपूर्ण कैलेंडर, जिसमें हर महीने की सटीक तिथि और समय (IST), महत्व, व्रत नियम और पूजा विधि दी गई है।

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अमावस्या 2026 तिथि लिस्ट मे- अमावस्या कैलेंडर 2026 और इस साल मे आने वाली सभी 12 महीनों की अमावस्या तिथि समेत व्रत, नियम और उनके महत्त्व की पूरी जानकारी शामिल है।

हर महीने मे एक रात ऐसी आती है जिसमे चंद्रमा आसमान से पूरी तरह गायब हो जाता है!

चाँद की रोशनी के बिना अंधेरी ये रात ही अमावस्या कहलाती है।

तमिल मे “अमावसाई”, कन्नड मे “अमावस्ये” और तेलुगु मे “अमावासी” के नाम से जानी जाने वाली इस रात का अंधकारमय होने के बावजूद हमारे शास्त्रों मे बहुत महत्त्व है और इसीलिए दिवाली, वट सावित्री व्रत और शनि जयंती जैसे कई बड़े त्योहार इस शुभ दिन मनाए जाते हैं।

इस साल 2026 मे कुल 12 अमावस्या पड़ रही हैं।

यहाँ पर आपको सम्पूर्ण अमावस्या कैलेंडर 2026 के साथ-साथ हर अमावस्या की सटीक तिथि, प्रारंभ और समाप्ति का समय (IST), व्रत विधि और उनका आध्यात्मिक महत्व भी मिलेगा।

आपके मन मे उठने वाले सवाल जैसे- “अमावस्या कब है 2026 ?” और “2026 में अमावस्या कितनी बार आएगी ?” – जानने के लिए अमावस्या 2026 तिथि लिस्ट देखें।

अमावस्या क्या होती है? — अर्थ और महत्व

चंद्र कैलेंडर के प्रत्येक चंद्र मास के कृष्ण पक्ष की 15वीं तिथि को आने वाली यह रात अमावस्या या अमावस के नाम से भी जानी जाती है।

“अमावस्या” शब्द संस्कृत से निकला है जिसमे “अमा = एक साथ” और “वस्य = निवास करना”।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह रात चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच घटने वाली एक खगोलीय घटना है जिसमे चंद्रमा और सूर्य एक ही दिशा मे होते हैं और चंद्रमा का अंधेरा भाग पृथ्वी की ओर होता है जिस कारण वह धरती पर दिखाई नहीं देता है।

हिन्दू शास्त्रों के अनुसार यह दिन निम्नलिखित कार्यों के लिए बहुत शुभ माना जाता है:

  • पितृ तर्पण: पितरों को जल अर्पण करने की एक श्राद्ध क्रिया।
  • श्री लक्ष्मी नारायण की उपासना करें।
  • दान पुण्य: भोजन, वस्त्र, धन इत्यादि का दान।
  • उपवास: विशेष रूप से मन की शुद्धि के लिए।
  • पवित्र नदियों मे स्नान: विशेष रूप से गंगा और गोदावरी स्नान।

नोट: इस पेज पर दिए गए सभी समय भारतीय मानक समय (IST, UTC+5:30) के अनुसार हैं। भारत के बाहर रहने वाले भक्त अपने शहर के अनुसार समय में अंतर करें।

अमावस्या 2026 तिथि लिस्ट- Amavasya 2026 Date List in Hindi

नीचे दी गई सूची मे आपको इस साल की सम्पूर्ण अमावस्या 2026 तिथि लिस्ट हिन्दी मे दी गई है।
माह (2026)अमावस्या का नामतारीखदिन
जनवरीमाघ अमावस्या (मौनी अमावस्या)18 जनवरी, 2026रविवार
फरवरीफाल्गुन अमावस्या (भौमवाती अमावस्या)17 फरवरी, 2026मंगलवार
मार्चचैत्र अमावस्या19 मार्च, 2026गुरुवार
अप्रेलवैशाख अमावस्या (बैसाख अमावस्या)17 अप्रेल, 2026शुक्रवार
मईज्येष्ठ अमावस्या (शनि अमावस्या/ वट सावित्री अमावस्या)16 मई, 2026शनिवार
जूनअधिक अमावस्या (सोमवती अमावस्या)15 जून,2026सोमवार
जुलाईआषाढ़ अमावस्या14 जुलाई 2026मंगलवार
अगस्तश्रावण अमावस्या (हरियाली अमावस्या)12 अगस्त,2026बुधवार
सितंबरभाद्रपद अमावस्या11 सितंबर, 2026शुक्रवार
अक्टूबरआश्विन अमावस्या (सर्वपितृ अमावस्या)10 अक्टूबर, 2026शनिवार
नवंबरकार्तिक अमावस्या (दीपावली)9 नवंबर, 2026सोमवार
दिसंबरमार्गशीर्ष अमावस्या8 दिसंबर, 2026मंगलवार

मासिक अमावस्या तिथि और समय 2026

अमावस्या तिथि और समय 2026 के बारे मे जानने के लिए आगे पढ़ें।

Amavasya Calendar 2026
Amavasya Calendar 2026

जनवरी 2026 की अमावस्या

Date
18 जन॰ 2026
रविवार
Tithi Begins
12:06 am
18 जन॰ 2026
Sanskrit
मौनी अमावस्या (माघ अमावस्या)
माघ मास मे आने वाली यह अमावस्या, मौनी अमावस्या के नाम से भी प्रचलित है और यह साल की सभी अमावस्याओं मे सबसे पवित्र है। मौनी अमावस्या पर इसके नाम के अनुरूप मौन व्रत रखा जाता है। प्रयागराज के माघ मेले के साथ आने वाली this अमावस्या पर पवित्र नदियों मे स्नान, पितृ-तर्पण और दान- पुण्य कार्यों का शास्त्रों में बहुत महत्त्व है। यह अमावस्या आध्यात्मिक शुद्धि और आंतरिक चेतना बढ़ाने के लिए सबसे ज्यादा फलदायी है इसीलिए इस दिन पापों से मुक्ति पाने के लिए हरे कृष्ण महामंत्र जप, गऊ सेवा और अन्नदान जैसे पवित्र संकल्प विशेष रूप से लेने चाहिए।

फरवरी 2026 की अमावस्या

Date
17 फ़र॰ 2026
मंगलवार
Tithi Begins
5:36 pm
16 फ़र॰ 2026
Sanskrit
भौमवती अमावस्या (Phalguna Amavasya)
फाल्गुन मास मे होली से ठीक पहले आने वाली फाल्गुन अमावस्या इस वर्ष मंगलवार को आ रही है इसलिए इसे भौमवाती अमावस्या के नाम से मनाया जाएगा। हनुमान जी की उपासना और पितृ अनुष्ठानों के लिए यह अमावस्या बहुत शुभ है। शास्त्रानुसार इस दिन अन्न का दान, गौ सेवा, साधु सेवा और काले तिल का दान करना अत्यंत पुण्यकारी है।

मार्च 2026 की अमावस्या

Date
19 मार्च 2026
गुरुवार
Tithi Begins
8:27 am
18 मार्च 2026
Sanskrit
चैत्र अमावस्या
सृष्टि के आरंभ के प्रतीक- चैत्र मास मे आने वाली यह अमावस्या नव आरंभ और आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक है। इस दिन से हिन्दू नववर्ष / गुड़ी पड़वा / उगादि की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। शास्त्रों मे इस दिन पितृ तर्पण, पवित्र नदियों मे स्नान, तिल, अन्न और वस्त्र दान का बहुत विशेष महत्त्व है। दक्षिण भारत मे इस दिन व्रत और मंदिर दर्शन की परंपरा भी बहुत प्रचलित है। हरे कृष्ण महामंत्र का जप और हरी नाम संकीर्तन भी इस दिन विशेष फल देते हैं।

अप्रैल 2026 की अमावस्या

Date
17 अप्रैल 2026
शुक्रवार
Tithi Begins
8:13 pm
16 अप्रैल 2026
Sanskrit
वैशाख अमावस्या (बैसाख अमावस्या)
वैशाख मास मे आने वाली वैशाख अमावस्या, बैसाख अमावस्या के नाम से भी प्रचलित है। शास्त्रों के अनुसार वैशाख अमावस्या के दिन ब्रहमुहूर्त मे किया गया पवित्र नदियों का स्नान कई जन्मों के पाप धो देता है। यह मास स्वयं अत्यंत पुण्यकारी है इसीलिए इस दिन पितृ तर्पण, श्राद्ध सेवा, और दान आम दिनों से ज्यादा फल देता है। यह दिन काम, क्रोध, अहंकार और लोभ जैसी आंतरिक बाधाओं पर विजय प्राप्त करने और आत्म-संयम की साधना के लिए भी विशेष है।

मई 2026 की अमावस्या

Date
16 मई 2026
शनिवार
Tithi Begins
5:13 am
15 मई 2026
Sanskrit
ज्येष्ठ अमावस्या (शनि अमावस्या / वट सावित्री अमावस्या)
ज्येष्ठ अमावस्या इस दिन शनिवार को पड़ रही है जिस कारण इसे शनि अमावस्या के नाम से मनाया जाएगा। ज्येष्ठ मास की यह अमावस्या वट सावित्री अमावस्या के नाम से भी प्रचलित है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं और वट (बरगद) के वृक्ष की पूजा करती हैं। इस दिन किए गए दान और पुण्य कर्म अक्षय पुण्य प्रदान करते हैं इसीलिए शास्त्रों मे इस दिन गौ सेवा अन्नदान और साधु भोजन का विशेष उल्लेख है। यह अमावस्या वामन देव के सार्वभौमिक स्वरूप त्रिविक्रम से भी जुड़ी है।

जून 2026 की अमावस्या

Date
15 जून 2026
सोमवार
Tithi Begins
12:21 pm
14 जून 2026
Sanskrit
अधिक अमावस्या (3 साल मे 1 बार आने वाली दुर्लभ तिथि)
अधिक मास की यह दुर्लभ अमावस्या 3 साल मे एक बार आती है क्यूंकी यह मास चंद्र और सौर गणना के संतुलन हेतु जोड़ा जाता है और इसे पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं। इस वर्ष, सोमवार के दिन पड़ने के कारण इसे सोमवती अमावस्या के नाम से मनाया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार इस दिन किए गए दान और धार्मिक कार्यों का पुण्य करोड़ गुना बढ़ जाता है और अमावस्या के प्रभाव से वो पुण्य अक्षय हो जाते हैं। भगवान विष्णु के सबसे प्रिय पुरुषोत्तम मास मे भगवद्गीता का पाठ, हरी नाम संकीर्तन, गौ सेवा और साधु सेवा का विशेष महत्त्व है।

जुलाई 2026 की अमावस्या

Date
14 जुल॰ 2026
मंगलवार
Tithi Begins
6:51 pm
13 जुल॰ 2026
Sanskrit
आषाढ़ अमावस्या
आषाढ़ अमावस्या चातुर्मास काल की शुरुआत में आती है — ये चार पवित्र महीने होते हैं जब वैष्णव भक्त विशेष व्रत और आध्यात्मिक नियमों का पालन करते हैं। इस वर्ष यह अमावस्या मंगलवार को पड़ रही है, इसलिए इसे भौमवती अमावस्या भी कहा जाता है, जो हनुमान जी की पूजा के लिए शुभ मानी जाती है। पितृ तर्पण, दान-पुण्य और भगवान विष्णु के वामन रूप की पूजा इस दिन के मुख्य अनुष्ठान हैं। इस अवधि में वृक्षारोपण करना भी आध्यात्मिक रूप से पुण्यकारी माना जाता है।

अगस्त 2026 की अमावस्या

Date
12 अग॰ 2026
बुधवार
Tithi Begins
1:55 am
11 अग॰ 2026
Sanskrit
श्रावण अमावस्या
हरियाली अमावस्या (हरियाली = प्रकृति और हरापन) श्रावण मास में आती है — यह महीना भगवान शिव को समर्पित सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है। उत्तर और मध्य भारत, विशेषकर राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में इसे प्रकृति और हरियाली के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन वृक्षारोपण, भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा तथा पितृ तर्पण का विशेष महत्त्व है। ग्रामीण क्षेत्रों में पेड़ों के नीचे मेले और झूले लगाए जाते हैं। परिवार के स्वास्थ्य और अच्छी वर्षा के लिए प्रार्थना करना भी इस दिन की परंपरा है।

सितंबर 2026 की अमावस्या

Date
11 सित॰ 2026
शुक्रवार
Tithi Begins
10:35 am
10 सित॰ 2026
Sanskrit
भाद्रपद अमावस्या
भाद्रपद अमावस्या पितृ पक्ष श्राद्ध पखवाड़े से ठीक पहले आती है, जो अगली पूर्णिमा से शुरू होता है। महाराष्ट्र और गुजरात के कुछ भागों में इस अमावस्या को पिठोरी अमावस्या के रूप में मनाया जाता है, जहाँ माताएँ अपने बच्चों के कल्याण के लिए व्रत और प्रार्थना करती हैं। इस दिन पितृ तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य का विशेष महत्त्व है। ध्यान, मौन और आत्म-संयम का पालन भी शुभ माना जाता है।

अक्टूबर 2026 की अमावस्या

Date
10 अक्टू॰ 2026
शनिवार
Tithi Begins
9:38 pm
9 अक्टू॰ 2026
Sanskrit
आश्विन अमावस्या (महालया अमावस्या)
आश्विन अमावस्या पितृ कर्मों के लिए पूरे वर्ष का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। यह पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) के अंतिम दिन आती है — ये 16 दिन पूर्वजों को समर्पित होते हैं। इस दिन जिन लोगों से अपने पितरों की तिथि पर श्राद्ध नहीं हो पाया हो, वे सभी पितरों के लिए एक साथ पितृ तर्पण और श्राद्ध कर सकते हैं, इसलिए इसे सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या भी कहा जाता है। इस वर्ष यह अमावस्या शनिवार को पड़ रही है, इसलिए यह शनि अमावस्या भी है। बंगाल में महालया से दुर्गा पूजा उत्सव की शुरुआत मानी जाती है। पितरों की स्मृति में भोजन, वस्त्र और आवश्यक वस्तुओं का दान इस दिन अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।

नवंबर 2026 की अमावस्या

Date
9 नव॰ 2026
सोमवार
Tithi Begins
11:30 am
8 नव॰ 2026
Sanskrit
कार्तिक अमावस्या (दीपावली)
कार्तिक मास मे आने वाली यह अमावस्या साल की सबसे प्रसिद्ध और उल्लासमय अमावस्या है। इस दिन हर घर दीप जला कर दिवाली का त्योहार मनाया जाता है और धन, सुख, समृद्धि की प्राप्ति के लिए माता लक्ष्मी और श्री गणेश जी की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन को श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के वध तथा भगवान श्रीराम के अयोध्या मे पुनः आगमन के उल्लास में भी मनाया जाता है– इस दिन हरे कृष्ण महामंत्र का जप, हरी नाम संकीर्तन, सेवा और दान कार्यों का अन्य सभी महीनों से सबसे अधिक फल मिलता है।

दिसंबर 2026 की अमावस्या

Date
8 दिस॰ 2026
मंगलवार
Tithi Begins
4:15 am
7 दिस॰ 2026
Sanskrit
मार्गशीर्ष अमावस्या
मार्गशीर्ष अमावस्या 2026 की अमावस्या श्रृंखला का समापन करती है। मार्गशीर्ष मास भगवान श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय माना जाता है — भगवद्गीता में भगवान कृष्ण स्वयं कहते हैं, “मासों में मैं मार्गशीर्ष हूँ।” यह अमावस्या मंगलवार को पड़ रही है, इसलिए यह भौमवती अमावस्या भी मानी जाती है और हनुमान जी की उपासना के लिए शुभ है। इस दिन सत्यनारायण पूजा, पितृ तर्पण और दान-पुण्य करना विशेष रूप से उत्तम माना जाता है। यह दिन आत्मचिंतन, कृतज्ञता व्यक्त करने और वर्षभर की भूलों के लिए क्षमा मांगने का दिन है।

2026 की सबसे महत्वपूर्ण अमावस्या

माघ अमावस्या

यह आंतरिक शुद्धि और आध्यात्मिक वृद्धि के लिए सबसे अनुकूल समय है। इस दिन भक्त एक नए पाप मुक्त जीवन की शुरुआत पवित्र संकल्प और हरे कृष्ण महामंत्र के जप से करते हैं।

फाल्गुन अमावस्या

फाल्गुन अमावस्या का यह समय भगवान विष्णु के प्रति पूर्ण समर्पित भक्ति भाव को प्रेरित करता है। इस दिन जरूरतमंदों को भोजन कराना और गौ सेवा करना बहुत शुभ होता है।

चैत्र अमावस्या

यह समय ब्रह्मांड के पालनहार - भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन उपवास रखकर हरे कृष्ण महामंत्र का जप करें और मंदिर मे सेवा और हरी नाम संकीर्तन मे अवश्य भाग लें।

वैशाख अमावस्या

यह अमावस्या अपने अंदर के नकारात्मक विचारों जैसे: गुस्सा, अहंकार, काम, लालच आदि पर विजय का प्रतीक है। इस दिन भक्त को जरूरी है की वह सेवा, दान और हरे कृष्ण महामंत्र का जप करे।

ज्येष्ठअमावस्या

इस दिन भगवान वामन के विश्वरूप, त्रिविक्रम की पूजा की जाती है।

भक्त और अभक्त, यह दिन दोनों को भक्ति और सेवा मे अग्रसर रहने के लिए प्रेरित करता है।

अधिक अमावस्या

यह अमावस्या सभी महीनों मे सबसे उत्तम, अधिक महीने मे आती है जो भक्ति और धार्मिक कार्यों के लिए सबसे शुभ है।

इस दिन पवित्र शास्त्र जैसे भगवद्गीता पढ़ना, दान करना, और हरे कृष्ण महामंत्र जप का बहुत विशेष महत्त्व है।

आषाढ़ अमावस्या

यह दिन भगवान विष्णु के सबसे दिव्य स्वरूप, भगवान वामन की भक्ति को समर्पित है। उनकी भक्ति हमें करुणा और समर्पण सिखाती है।

इस दिन सरल जीवन जीना, दान करना और मंदिर मे सेवा करने का विशेष महत्त्व है।

श्रावण अमावस्या

यह दिन सृष्टि के पालनहार, भगवान विष्णु की भक्ति और पूजा को समर्पित है, इस दिन भगवान विष्णु की आराधना परिवार मे सुख शांति और समृद्धि के लिए की जाती है।

भाद्र अमावस्या

यह अमावस्या सभी जीवों की इंद्रियों के नियंत्रक, श्री ऋषिकेश को समर्पित है। उनकी उपासना जीवन मे आत्म-संयम और अनुशासन को प्रेरित करती है।

भक्त इस दिव्य अवसर का प्रयोग एकाग्र और शांत भाव से बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के साधना करने के लिए करते हैं।

आश्विन अमावस्या

यह दिन विशेष रूप से पितृ कृपा और आशीष आकर्षित करता है। इस दिन सभी पितरों के लिए सामूहिक श्राद्ध कर के परिवार के लिए आत्मिक स्तर की शांति और आशीष की कामना की जाती है।

कार्तिक अमावस्या

दामोदर, श्री कृष्ण के मुख्य नामों मे से एक है, जो उनकी दामोदर लीला के बाद पड़ा था। . इस लीला मे यशोदा मैया ने श्री कृष्ण से परेशान होकर उन्हे ओखल से बांध दिया था।

माना जाता है की इस दिन हरे कृष्ण महामंत्र जप, गीता पढ़ना, और हरी नाम संकीर्तन करके कृष्ण चेतना को जागृत किया जा सकता है।

मार्गशीर्ष अमावस्या

आत्मिक चिंतन और कृतज्ञता के भाव के साथ यह अमावस्या चंद्र चक्र का अंत करती है। इस दिन कोई भी व्यक्ति अपने पापों के प्रति प्रायश्चित, दया और आध्यात्मिक निष्ठा की कामना कर सकता है।

अमावस्या पर क्या करें?

  1. 01

    इस दिन हरे कृष्ण महामंत्र का जप और ध्यान करें

  2. 02

    सात्त्विक भोजन ग्रहण करें

  3. 03

    मंदिर मे गौ सेवा, अन्नदान सेवा, गीता वितरण जैसी सेवाओं मे भाग लें

  4. 04

    नजदीकी मंदिर जाएं

  5. 05

    अपने पितरों का तर्पण करें और उनकी शांति के लिए प्रार्थना करें

अमावस्या व्रत के आध्यात्मिक लाभ

  1. 01

    यह नकारात्मक कर्मों के प्रभाव से मुक्त करता है

  2. 02

    यह पितरों को मोक्ष प्रदान करता है

  3. 03

    यह मानसिक शांति, स्पष्ट विचारधारा और सम्पूर्ण भावनात्मक शांति प्रदान करता है

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस वर्ष 2026 में कुल 12 अमावस्या हैं। पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव से इनका पालन करने वाले साधक के लिए प्रत्येक अमावस्या विशेष आध्यात्मिक लाभ प्रदान करती है।

निष्कर्ष

अमावस्या, भक्ति, व्रत, सेवा और दान जैसे शास्त्र सम्मत धार्मिक कार्यों द्वारा अपने भीतर के भय, अहंकार, काम और गुस्से की भावना पर विजय प्राप्त करने का दिन है।

2026 की ये 12 अमावस्याएँ आपके और आपके परिवार के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आएँ, यही गुप्त वृंदावन धाम की ओर से हार्दिक कामना है।

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